घर जमीन पर फ्लैट आसमान में
घर जमीन पर
फ्लैट आसमान में
कितनी दीवारे
कितनी छते
कितने घर
एक दूसरे से सटे हुए
हर घर में अलग परिवार
लेकिन पूरा मोहल्ला
जैसे एक परिवार
सबका सुख-दुख सांझा
सबका खाना पीना
मिल बांट कर
हर त्यौहार सांझा
हर कोई
एक दूसरे की मदद के लिए
सदा तैयार
अपनी कक्षा के अनुसार
एक दूसरे को पढ़ाना,
उसकी मदद करना
कोई ट्यूशन नहीं
बस सिर्फ सहयोग और सहायता
वह भी मन से
लेकिन अब
ऊंची ऊंची मीनार सी इमारतें
एक के ऊपर एक घर नहीं,
फ्लैट के ऊपर फ्लैट
रहने वाला हर परिवार
अपने में फ्लैट
किसी से कोई मतलब नहीं
किसी से लगाव नहीं
सबकी अपनी अपनी डफली
अपना अपना राग,
और अब इस कृत्रिम बुद्धिमानी के दौर में
हर इंसान एक दूसरे से अनजान।
— जय प्रकाश भाटिया
