कविता

यह भारत वीरों का है

आज तिरंगे की शपथ है, सिर कभी झुकने न देंगे,
भारत माँ के मान पर, कदम कभी न हम रुकने देंगे।

हिमगिरि से सागर तक गूँजे भारत का जयगान,
हर धड़कन में बसता है अपना पावन हिंदुस्तान।

यह वही धरती है जहाँ गाँधी ने सत्य सिखाया था,
अहिंसा की शक्ति से दुनिया को जीना सिखाया था।

यह वही भूमि है जहाँ सुभाष ने हुंकार भरी थी,
“तुम मुझे ख़ून दो” की गूँज से हर रग में आग भरी थी।

भगत सिंह की मुस्कान आज भी इंक़लाब सुनाती है,
फाँसी का फंदा भी उनकी वीरता पर इतराती है।

चन्द्रशेखर आज़ाद ने हमें जीना भी आज़ाद सिखाया,
दुश्मन के आगे झुकना क्या होता है, कभी न बताया।

राजगुरु और सुखदेव की अमर कहानी हम सब गाते हैं,
हर पीढ़ी उनके बलिदानों पर श्रद्धा से शीश झुकाती है।

रामप्रसाद बिस्मिल की लेखनी भी तलवार बनी,
हर पंक्ति में मातृभूमि की जय-जयकार बनी।

अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ ने अमर संदेश सुनाया,
मज़हब से ऊपर भारत-प्रेम का दीप जलाया।

मंगल पांडे के बलिदान की पहली चिंगारी शोला बनी,
अंग्रेज़ी गुलामी की हर ज़ंजीर कमज़ोर पड़ी।

रानी लक्ष्मीबाई की तलवार आज भी चमक रही है,
हर बेटी के साहस में उनकी छवि दमक रही है।

उधम सिंह ने अन्याय का उत्तर देकर बता दिया,
भारत का वीर सपूत अत्याचार कभी नहीं सहता।

सरदार पटेल ने अखंड भारत का सुंदर स्वप्न सजाया,
एकता के धागों से राष्ट्र का मुकुट सजाया।

वीर छत्रपति शिवाजी ने स्वराज का बिगुल बजाया,
साहस, नीति और पराक्रम से भारत का मान बढ़ाया।

महाराणा प्रताप ने स्वाभिमान की लौ जलाए रखी,
हर कठिन संघर्ष में मातृभूमि की आन बचाए रखी।

गुरु गोबिंद सिंह ने वीरता का अमृत बरसाया,
धर्म, न्याय और मानवता का पावन पथ दिखलाया।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा की गरिमा बढ़ाई,
सादगी, सेवा और समर्पण से राष्ट्रधर्म की ज्योति जगाई।

डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अधिकारों का दीप जलाया,
संविधान देकर लोकतंत्र का गौरव जन-जन तक पहुँचाया।

लाल बहादुर शास्त्री का संदेश सदा अमर रहेगा,
“जय जवान, जय किसान” युग-युग तक अमर रहेगा।

स्वामी विवेकानंद ने युवा चेतना को विश्व में जगाया,
ज्ञान, सेवा और आत्मबल का पावन मंत्र सुनाया।

विक्रम साराभाई ने विज्ञान का आकाश सजाया,
अंतरिक्ष में भारत का स्वर्णिम परचम लहराया।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने साहित्य और संस्कृति का मान बढ़ाया,
“जन गण मन” से भारत का गौरव विश्व में गाया।

श्रीनिवास रामानुजन ने बुद्धि का प्रकाश फैलाया,
संख्याओं के रहस्यों से जग में भारत का नाम चमकाया।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने सपनों को उड़ान दी,
विज्ञान, विनम्रता और कर्म से भारत को नई पहचान दी।

हम उन वीर शहीदों के सपनों का भारत बनाएँगे,
मेहनत, ईमान और प्रेम का दीप सदा जलाएँगे।

न जाति से बँटेंगे, न धर्म के नाम पर लड़ेंगे,
भारत माँ की ख़ातिर हर चुनौती से हम लड़ेंगे।

तिरंगा हमारी आन है, तिरंगा हमारी शान,
इसके लिए समर्पित है अपना तन, मन और प्राण।

जब-जब इस धरती पर संकट का बादल छाएगा,
भारत का हर वीर सपूत सीमा पर डट जाएगा।

राष्ट्रध्वज की हर लहराती शान हमारा अभिमान है,
भारत की मिट्टी का कण-कण हम सबकी पहचान है।

आओ मिलकर ऐसा इतिहास नया रच जाएँ,
वीरों के अधूरे सपनों को हम मिलकर पूरा कर जाएँ।

स्वाधीनता की यह ज्योति सदा प्रखर जलती रहे,
भारत की गौरवगाथा युगों-युगों तक चलती रहे।

एक स्वर में गूँजे भारत का अमर जयगान,
विश्वगुरु बनकर चमके अपना महान हिंदुस्तान।

वीरों के बलिदानों से पावन यह हिंदुस्तान,
वंदे मातरम् गूँजे, अमर रहे तिरंगे की शान।

वंदे मातरम्! भारत माता की जय! जय हिंद!
जय जवान! जय किसान! जय विज्ञान!

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com

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