मुक्तक/दोहा

आइसक्रीम की मस्ती

नन्हे हाथों में सजी, आइसक्रीम की शान।
खाते-खाते मुस्कुरा, खिल उठा नन्हा जान।।

गाड़ी दौड़े राह पर, मन में छाई मौज।
मीठी-मीठी आइसक्रीम, खुशियों की है खोज।।

मम्मी-पापा साथ हों, सफर बने त्योहार।
नन्ही हँसी बिखेरती, खुशियों की बौछार।।

ठंडी-ठंडी आइसक्रीम, मीठा इसका स्वाद।
एक निवाला खा लिया, भूल गया सब याद।।

खिड़की से झाँके पवन, पेड़ करें मुस्कान।
चलती गाड़ी में मिले, सपनों का संसार।।

नन्हे मन की खुशी में, कितना सुंदर राज।
थोड़ी-सी खुशियाँ मिलें, खिल उठता हर आज।।

— डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh