हाइकु कविताएं
मेघ बरसे
दादुर टर्र- टर्र
करने लगे।
बरखा रानी
झरने लगी बूंदें
पानी ही पानी।
बहुत भाता
बारिश का मौसम
बालपन को ।
मेघ गरजे
कजरारे बादल
डर के गिरे।
तरसे धरा
बूंद-बूंद बरसे
सावन सूखे।
अमृत बूंद
आ गिरी होंठों पर
मिलती तृप्ति।
— वाई. वेद प्रकाश

सुन्दर रचना