तस्वीर के चक्कर में बदला सुर
एक कवयित्री ने युवा उम्र की तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट कर दी। कोई भी चित्र देखता उसके प्रति स्नेह जागृत हो उठता। ऐसी सुंदर तस्वीर देखकर उम्रदराज लोगों के हृदय में हलचल सी मच गयी। एक से एक महारथी प्रेम के खूबसूरत-खूबसूरत शब्दों से टिप्पणी उनके टिप्पणी बाक्स में करने लगे।
जिसने भी तस्वीर देखा। तारीफों का ऐसा पूल बांध रहे थे कि पूरी उम्र गुजारने को तैयार हैं। जीवन की समस्त कमाई देवी के चरणों में समर्पित करने को तैयार हैं। कई कवियों ने तो मिलने की शुभमुहूर्त निकालने की बात कर दी। बहुत कवियों को उम्मीद मिलने की नजर आने लगी।
कुछ बुजुर्ग कवियों ने तो बालों की कटाई-छंटाई पहले से करा ली। मेकअप भी करवा डाले। टूटे दांत भी लगवा लिये। कवयित्री के नजरों में वृध्द नहीं दिखाई देना चाहते थे। कुछ ने तो भावुक अपील की। कई सालों से विरह की वेदना में जल रहा हूँ। एक बार हमारी आपकी मुलाकात हमारे लिए एक संजीवनी की तरह काम करेगा।
एक से रहा न गया। सौगंध तक खा डाली। पूरा ख्याल रखूंगा। जो साड़ी कहेंगी । वो भी एक नहीं पूरी दुकान ही खरीदकर दे दूंगा। सादगी वाले आदमी हैं। शराब तो हाथ नहीं लगाते। गलत संगत मेरी नहीं रही। सच कहूं। एक बार गलत संगत में पढ़ गया था। आधी जिंदगी बर्बाद हो गयी। आधी बची जिंदगी को निष्ठापूर्वक जीने को तैयार हूँ।
इस तरह की कमेंट सुनकर कवयित्री सुन्नावस्था महसूस किया। कवयित्री बेचारी भयभीत हो गयी। इस तरह की उम्मीद नहीं थी कि ऐसा-ऐसा कमेंट देखने को मिलेगा। लोगों की आंख की पट्टी हटाने के लिए कवयित्री ने जल्दी से अपनी असली उम्र की तस्वीर पोस्ट की और लिखा कि इस साल वह साठ साल की हो गयीं हैं। इसके पहले की तस्वीर युवाकाल की थी।
अपनी जिंदगी की नई पारी खेलने वाले को गंभीर धक्का लगा। कुछ को हृदयाघात हुआ। कुछ ने अपनी किस्मत पर मस्तक ठोंका। बाजी हाथ से निकल गयी। कुछ ने उधर मुंह फेर लिया। कुछ ने ठंडा पानी पिया। कवयित्री ने भी राहत की सांस ली। इतनी बड़ी संख्या में आये आफर से शर्मिंदगी महसूस की। अब कभी भी सौंदर्य से युक्त तस्वीर न डालने का अटल फैसला लिया।
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
