सामाजिक

ज़िंदगी के इस सफ़र में कोई मंज़िल है ही नहीं

ज़िंदगी वाक़ई एक ऐसा अनसुना सफ़र है, जिसका न कोई तयशुदा नक़्शा है और न ही यह मालूम है कि यह किस मोड़ पर थम जाएगी।
​ज़िंदगी महज़ सांसों के आने-जाने का नाम नहीं, यह एक ऐसा मुसलसल सफ़र है जिसका कोई आगाज़ तो है, मगर अंजाम किसी को मालूम नहीं। हम सब एक ऐसी राह के मुसाफ़िर हैं, जहाँ हर नया क़दम एक नया इम्तहान और हर मोड़ एक अनसुनी दास्तान बन कर सामने आता है।
​अक्सर हम उम्र भर किसी ‘मंज़िल’ की तलाश में भागते रहते हैं,यह सोचते हुए कि शायद किसी मक़ाम पर पहुँच कर यह तलाश ख़त्म हो जाएगी। मगर सच तो यह है कि इस सफ़र में कोई मंज़िल है ही नहीं। ज़िंदगी ख़ुद अपने आप में एक मु मुकम्मल मंज़िल है। अगर ठहरना ही सब कुछ होता, तो रास्ते कभी बनाए ही न जाते। असल ख़ूबसूरती तो इस बात में है कि मुसाफ़िर चलते रहना सीख ले, फ़िर चाहे राह कितनी भी पुर-पेच (उलझन भरी) क्यों न हो।
​कहाँ, कब और कैसे यह सफ़र तमाम (खत्म) होगा, इसका इल्म तो बस वक्त के मुहाफ़िज़ को ही है। हमारे इख़्तियार में सिर्फ़ इतना है कि हम इस बे-नाम सफ़र को किस शिद्दत, किस मोहब्बत और किस सुकून से गुज़ारते हैं। अंधेरों से डर कर रुक जाने के बजाए, हर क़दम पर रौशनी की तलाश करना ही इस सफ़र का असली हुनर है।
​”सफ़र जारी रखो कि मंज़िल ख़ुद ब ख़ुद रास्तों में ढल जाएगी,
जो ठहर गए वो थक गए, जो चल दिए वो अमर हुए।”
​अंततः, यह मुसाफ़िरत ही हमारी पहचान है। मंज़िल की फिक्र छोड़कर, इस हसीन सफ़र के हर लम्हे को जीना ही ज़िंदगी का असल फ़लसफ़ा है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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