कुदरत के नज़ारे
देखो, लगते बड़े निराले,
बादल छाए काले-काले।
बादल घिरे, अंधेरी छाई,
चारों ओर रात घिर आई।।
निकले नील गगन के घर से,
टप-टप करके बादल बरसे।
रिमझिम-रिमझिम बरखा लाए,
गर्मी सारी दूर भगाए।।
हर्षित देखा जब नील गगन,
बच्चे सारे तब हुए मगन।
छू-मंतर हुई गरमी सारी,
मारें सब मिलकर किलकारी।।
बनी सब गलियां ताल-तलैया,
नाचे मिलकर ता-ता-थैया।
पानी बरसा इतना खासा,
लगता जैसे हो चौमासा।।
देखा तब अजीब तमाशा,
इंद्रधनुष ने रूप तराशा।
कुदरत के ये अजब नजारे,
लगते सबको प्यारे-प्यारे।।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
