हम तुम जब साथ साथ हैं
हम तुम जब हैं साथ साथ तो,लोगों से क्या डरना है।
राह सत्य की चलते रहना, काम सही जो करना है।
निंदक निंदा करते रहते, काम उन्हीं का वैसा है।
सुन लो तुम पर कान धरो मत, होता जग में ऐसा है।
छोड़ो संगत बुरी लगे जो, हम को सदा उभरना है।
हम तुम जब हैं साथ साथ तो,लोगों से क्या डरना है।
कांटों से हर राह भरी हो, नहीं हमें घबराना है।
तूफान खड़े हों कितने भी, आगे कदम बढ़ना है।
गागर में सागर को मिल के, हिम्मत रख के भरना है।
हम तुम जब हैं साथ साथ तो,लोगों से क्या डरना है।
दो से दो मिल चार बनें हैं, सब को साथ मिलाना है।
मानवता का पाठ सभी को,घर घर आज सिखाना है।
नफरत ईर्ष्या द्वेष छोड़ के, मन का हर दुख हरना है।
हम तुम जब हैं साथ साथ तो,लोगों से क्या डरना है।
— शिव राज सन्याल
