कांग्रेस और इस्लामी आतंकवाद
फ्लाईदुबई की उड़ान में अपनी वीरता से 174 यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टेन स्मित मच्छार की प्रशंसा आज सारी दुनिया कर रही है और उनके जेहादी को-पायलट हमाम उल-हम्मामी की निन्दा की जा रही है। बड़े-बड़े देशों के प्रधानों ने कै. मच्छार की प्रशंसा करके उनको सम्मान दिया है। लेकिन घोर आश्चर्य है कि हमारे देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के किसी नेता ने न तो कै. मच्छार की प्रशंसा में और न जेहादी को-पायलट की निन्दा में एक शब्द भी कहा है और न कोई ट्वीट किया है।
यह समझा जाता है कि कांग्रेस और उसके नेतृत्व गाँधी-वाड्रा परिवार का यह रवैया इसलिए है कि ऐसा करने से उनके कटासुर वोट बैंक को खतरा हो सकता है अर्थात् उनको कटासुरों के वोट नहीं मिलेंगे। यदि यह सत्य है, जिसकी 99.9 प्रतिशत सम्भावना है, तो यह खतरा निम्न परिकल्पनाओं या मान्यताओं पर आधारित है-
- कि हमारे देश के कटासुर हर जेहादी आतंकवादी से आत्मिक रूप से जुड़े हुए हैं और उसकी कोई निन्दा सहन नहीं कर सकते।
- कि हमारे देश के कटासुर केवल उसी पार्टी को वोट देते हैं जो जेहादी आतंकवाद के साथ हो। जो दल इसके विरोध में बोलता है उसको वे कभी वोट नहीं देते।
- कि कांग्रेस को इस्लामी आतंकवाद या आतंकवादियों से कोई शिकायत नहीं है, उसे तो हिन्दुओं के महिमा मंडन से घोर शिकायत है।
यदि इन तीन बुनियादी परिकल्पनाओं या मान्यताओं में से एक भी सत्य है, तो वह हमारे देश के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, क्योंकि इससे निम्न निष्कर्ष निकलते हैं-
- हमारे देश का कटासुर समाज मूलतः देशद्रोही है और जेहादी आतंकवाद का समर्थक है। उसे देश के लाभ-हानि से कोई लेना-देना नहीं है। वे आस्तीन के साँप हैं जो हमारा ही खाकर हमें ही डसने की कोशिश करते हैं। अब इन साँपों को पूर्णतया कुचल देने की अतीव आवश्यकता है।
- कटासुर समाज को यह समझ लेना चाहिए कि इस प्रकार खुलेआम जेहादी आतंकवादी का समर्थन करने से वे स्वयं अपनी विश्वसनीयता और सुरक्षा को संकट में डाल रहे हैं, जिसके दूरगामी कुपरिणाम उनको ही भुगतने होंगे।
- हिन्दू समाज को जेहादी आतंकवाद के खुले या छिपे समर्थक दलों से पूर्णतः दूरी बना लेनी चाहिए और इनके उम्मीदवारों को – चाहे वे नामधारी हिन्दू ही क्यों न हों – एक भी वोट नहीं देना चाहिए। जब हिन्दू समाज एकजुट होकर इन हिन्दूद्रोही दलों का विरोध करेगा, तो ये अपने आप या तो नष्ट हो जायेंगे, या अपना देशद्रोही रवैया त्यागने को बाध्य होंगे।
— डॉ. विजय कुमार सिंघल
आश्विन कृ. 9, सं. 2083 वि. (5 अक्टूबर 2026)
