कविता – ख़ुश रहने का हुनर
ख़ुश रहने को सब कुछ होना ज़रूरी नहीं,
हर ख़्वाब का पूरा होना ज़रूरी नहीं,
जो मिला है,उसमें मुस्कुराना सीखिए,
हर पल को प्रेम से सजाना सीखिए।
दौलत से ही खुशियों का संसार नहीं बनता,
हर ऊँचा मुकाम दिल का करार नहीं बनता,
संतोष की चादर ओढ़कर तो देखिए,
छोटी-छोटी खुशियों को जोड़कर तो देखिए।
दूसरों की चमक देखकर ख़ुद को न तौलें,
मन की उदासी को उम्मीदों से खोलें,
हर जीवन की अपनी कहानी होती है,
हर मुस्कान के पीछे एक रवानी होती है।
कल की चिंता में आज न गँवाइए,
बीते हुए कल को दिल से विदा कीजिए,
जो पास है, उसकी क़दर करना सीखिए,
हर साँस में जीवन का शुक्र करना सीखिए।
ख़ुशी कोई मंज़िल नहीं,जीने का अंदाज़ है,
संतोष भरे दिल में ही सच्चा सरताज है,
किशन सब कुछ पाकर भी मन बेचैन रह सकता है,
थोड़े में खुश इंसान भी बादशाह बन सकता है।
— किशन सनमुखदास भावनानी
