बाल कहानी – सच्चा मित्र
एक घने जंगल के किनारे हरे-भरे पेड़ों से घिरा एक सुंदर मैदान था। मैदान के पास ही एक छोटा-सा तालाब था, जिसमें नीला-नीला पानी चमकता रहता था। वहाँ हिरन, कछुआ, चूहा और कौआ—चारों की अच्छी मित्रता थी। वे अलग-अलग स्वभाव के थे, लेकिन एक-दूसरे की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते थे।
एक दिन सुबह हिरन पेड़ के नीचे घास चर रहा था। तभी एक नन्हा चूहा उछलता-कूदता उसके पास आया।
“मित्र हिरन! आज तुम बहुत खुश दिखाई दे रहे हो। क्या बात है?” चूहे ने पूछा।
हिरन मुसकराया, “आज मौसम कितना सुहाना है! सोचा, तालाब के पास जाकर ठंडा पानी पी आऊँ।”
तभी पास ही धीरे-धीरे चलता हुआ कछुआ बोला, “मैं भी चलूँगा। लेकिन तुम दोनों बहुत तेज चलते हो, मेरा ध्यान रखना।”
ऊपर पेड़ पर बैठा कौआ काँव-काँव करता हुआ बोला, “और मैं तो आकाश से तुम सबकी रखवाली करूँगा!”
चारों मित्र हँस पड़े।
“चलो, फिर साथ-साथ चलते हैं,” हिरन ने कहा।
वे तालाब की ओर चल पड़े। तालाब के पास पहुँचकर सभी ने पानी पिया। चूहा कछुए की पीठ पर चढ़कर बोला, “वाह! आज तो मेरी सवारी भी हो गई।”
कछुआ हँसते हुए बोला, “अरे भाई, धीरे बैठो। मैं कोई घोड़ा नहीं हूँ!”
उसी समय कौए की नजर दूर पड़ी। उसने देखा कि जंगल के रास्ते पर एक आदमी हाथ में लकड़ी और एक थैला लिए चला आ रहा है।
कौआ तुरंत गंभीर हो गया।
“सावधान मित्रों! उधर कोई आदमी आ रहा है। हमें सतर्क रहना चाहिए।”
चारों ने ध्यान से देखा। वह आदमी चुपचाप इधर-उधर देखता हुआ आगे बढ़ा और कुछ देर बाद वहाँ से चला गया।
“शायद वह जंगल में कुछ खोज रहा था,” हिरन ने कहा।
कौए ने कहा, “हो सकता है। लेकिन हमें सावधानी रखनी चाहिए।”
अगले दिन चारों मित्र फिर उसी मैदान में मिले। हिरन ने थोड़ी दूर हरी घास देखकर कहा, “मैं जरा वहाँ तक जाता हूँ।”
चूहे ने तुरंत कहा, “बहुत दूर मत जाना।”
“ठीक है,” हिरन ने हँसकर उत्तर दिया।
हिरन कुछ ही कदम आगे बढ़ा था कि अचानक उसके पैर एक जाल में फँस गए।
“बचाओ! बचाओ!” हिरन घबरा गया।
कछुआ और चूहा उसकी आवाज सुनकर दौड़े। ऊपर उड़ रहे कौए ने भी नीचे देखा।
“अरे! हिरन जाल में फँस गया है!” कौआ जोर से बोला।
कछुआ घबराकर बोला, “अब क्या करें?”
हिरन ने जाल से निकलने की कोशिश की, लेकिन वह और उलझता जा रहा था।
“मित्रों, मुझे बहुत डर लग रहा है,” हिरन ने कहा।
चूहे ने उसका हौसला बढ़ाया, “डरो मत! हम तुम्हें अकेला नहीं छोड़ेंगे।”
कौआ बोला, “हमें जल्दी से कोई उपाय करना होगा। जिसने यह जाल लगाया है, वह वापस भी आ सकता है।”
कछुए ने कुछ सोचकर कहा, “चूहे भाई, तुम्हारे दाँत बहुत तेज हैं। क्या तुम जाल की रस्सियाँ काट सकते हो?”
चूहा बोला, “मैं पूरी कोशिश करूँगा।”
वह जाल के पास पहुँचा और एक-एक करके रस्सियाँ कुतरने लगा।
“कुतर-कुतर-कुतर… बस थोड़ी देर और!” चूहा बोला।
हिरन बोला, “शाबाश मित्र! तुम कर सकते हो।”
कौआ ऊपर उड़कर निगरानी करने लगा।
अचानक उसने देखा कि वही आदमी वापस आ रहा है।
“मित्रों! जल्दी करो। वह आदमी वापस आ रहा है!” कौए ने चेतावनी दी।
चूहे ने तेजी से जाल की रस्सियाँ काटनी शुरू कर दीं। कछुआ भी अपने मजबूत शरीर से जाल को एक ओर खींचने लगा।
“एक… दो… तीन!” चूहे ने जोर लगाते हुए कहा।
रस्सी टूट गई।
“हिरन, अब तुम निकल सकते हो!” चूहा चिल्लाया।
हिरन ने पूरी ताकत लगाई और जाल से बाहर निकल आया। वह कुछ दूर जाकर सुरक्षित खड़ा हो गया।
“मैं बच गया!” हिरन खुशी से बोला।
कौआ चिल्लाया, “जल्दी! सभी इधर से हटो!”
चारों मित्र पेड़ों और झाड़ियों की ओट में छिप गए।
कुछ ही क्षण बाद वह आदमी वहाँ पहुँचा। उसने देखा कि जाल खाली पड़ा है।
“अरे! इसमें तो कोई जानवर था। आखिर गया कहाँ?” वह बड़बड़ाया।
कौआ पेड़ के पीछे से सब देख रहा था। उसने धीरे से अपने मित्रों से कहा, “अब यह जाल यहाँ नहीं रहना चाहिए। किसी और जानवर के लिए भी खतरा बन सकता है।”
चूहा बोला, “बिल्कुल! हमें इसे हटा देना चाहिए।”
हिरन ने कहा, “लेकिन अभी सुरक्षित रहना जरूरी है।”
जब वह आदमी वहाँ से चला गया, चारों मित्र बाहर आए। उन्होंने मिलकर जाल को मैदान से दूर कर दिया, ताकि कोई दूसरा जीव उसमें न फँसे।
हिरन ने भावुक होकर कहा, “आज मुझे समझ आया कि सच्चे मित्र वही होते हैं, जो संकट में साथ खड़े रहें।”
कछुआ मुसकराया, “और यह भी कि छोटा-बड़ा कोई नहीं होता। संकट के समय हर किसी की अपनी विशेषता काम आती है।”
कौआ बोला, “मैंने ऊपर से खतरा देखा, कछुए ने जाल खींचा और चूहे ने अपनी बुद्धि और मेहनत से रस्सियाँ काटीं।”
चूहा हँस पड़ा, “और हिरन ने भी हिम्मत नहीं छोड़ी!”
हिरन ने अपने तीनों मित्रों की ओर देखा।
“यदि हममें से कोई अकेला होता तो शायद मुझे बचाना कठिन होता। हमारी एकता ने मुझे बचाया।”
चारों मित्रों ने एक-दूसरे की ओर देखा और मुसकराए।
उस दिन से उन्होंने निश्चय किया कि वे जंगल के अन्य जीवों को भी ऐसे खतरों से सावधान करेंगे। कौआ दूर-दूर तक निगरानी रखता, चूहा छोटे-छोटे खतरों को पहचानता, कछुआ सबको धैर्य रखना सिखाता और हिरन जंगल के जीवों को साथ लेकर चलता।
तालाब के किनारे बैठकर चूहे ने कहा, “हमारी दोस्ती का सबसे बड़ा राज क्या है?”
कछुआ बोला, “विश्वास।”
कौआ बोला, “सावधानी।”
हिरन ने कहा, “और एकता!”
चारों एक साथ हँस पड़े।
सूरज धीरे-धीरे पश्चिम की ओर ढल रहा था। तालाब का पानी सुनहरी रोशनी से चमक रहा था। चारों मित्र अपने घरों की ओर चल पड़े।
उस दिन जंगल ने एक बड़ी सीख सीखी—
मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी हो, यदि मित्र मिलकर बुद्धि, साहस और एकता से उसका सामना करें तो रास्ता जरूर निकल आता है।
कहानी की सीख
“एकता में शक्ति है। सच्चा मित्र वही है, जो संकट के समय साथ खड़ा रहे और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखे।”
— गौरीशंकर वैश्य विनम्र
