सामाजिक

औलाद का डर, ममता और फ़िक्र का अनकहा संसार

माँ-बाप और औलाद का रिश्ता इस कायनात का सबसे पवित्र, अनमोल और निःस्वार्थ बंधन है। इस रिश्ते की नींव केवल प्यार पर नहीं, बल्कि एक असीम फ़िक्र पर टिकी होती है। तस्वीर में दिए गए शब्द— “औलाद का डर, कभी-कभी माँ-बाप की नींद छीन लेता है”,इसी गहरी भावना का आईना हैं। यह डर किसी खौफ या कमज़ोरी का प्रतीक नहीं, बल्कि उस अगाध स्नेह का परिणाम है जो एक माता-पिता अपनी संतान के लिए अपने दिल में संजोए रखते हैं.
समाज में अक्सर यह समझा जाता है कि माँ-बाप को बच्चों के भविष्य, उनकी पढ़ाई या उनकी सफ़लता की चिंता सताती है। लेकिन सच तो यह है कि उनका सबसे बड़ा डर बच्चों के बड़े होने का नहीं, बल्कि उनके ग़लत रास्ते पर भटक जाने का होता है.
आज की इस तेज़ रफ़्तार और चकाचौंध भरी दुनिया में, जहाँ हर क़दम पर नैतिकता और संस्कारों की परीक्षा होती है, माँ-बाप का दिल हर पल इसी शंका में रहता है कि कहीं उनकी संतान किसी ग़लत संगत या मार्ग का शिकार न हो जाए.
यह फ़िक्र रातों की नींद उड़ा देती है, क्योंकि वे अपनी औलाद को केवल सफ़ल नहीं, बल्कि एक अच्छा और नेक इंसान बनते देखना चाहते हैं।
हर माता-पिता की यह हार्दिक इच्छा होती है कि उनकी औलाद खुश रहे, समाज में मान-सम्मान पाए और हमेशा अच्छे संस्कारों को अपनाए.
वे खुद तकलीफें सहकर अपनी संतान के जीवन को फूलों की तरह सजाने की कोशिश करते हैं।
उनके लिए ‘औलाद की खुशी’ ही उनकी अपनी दुनिया का केंद्र होती है.
माँ-बाप की अपनी कोई बड़ी ख़्वाहिश नहीं होती, उनकी रातों का सुकून और दिनों की मेहनत सिर्फ इस बात पर टिकी होती है कि उनका बच्चा सही रास्ते पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाए.
यह सच है कि माँ-बाप का यह डर कभी-कभी उनकी सख्ती या बार-बार टोकने के रूप में सामने आता है, लेकिन इसके पीछे केवल और केवल बेपनाह प्यार छुपा होता है. यह डर इस बात का प्रमाण है कि माता-पिता अपनी संतान से कितना गाढ़ा प्रेम करते हैं। अंततः औलाद की सुरक्षा और उसका सही मार्ग ही माँ-बाप के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है, और उनका हर डर उनकी इसी महान ममता की एक कोमल परछाई है.
“माँ-बाप की डाँट में भी दुआ होती है, और उनके हर डर में सिर्फ़ और सिर्फ़ औलाद के प्रति सच्चा प्यार होता है।”

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

Leave a Reply