संस्मरण

पुरानी डायरी और कुछ भूल-बिसरे पन्ने

कैसे हो तुम? उम्मीद है तुम्हारी दुनिया अब भी उसी मद्धम सी रोशनी और सुकून भरी ख़ामोशी में बसती होगी, जहाँ वक़्त जैसे थम सा जाता है।

आज जाने क्यों पुरानी डायरी और कुछ भूल-बिसरे पन्ने पलटते हुए वो दौर आँखों के सामने आ गया, जब वक़्त किसी और ही रफ़्तार से चला करता था। तुम्हें याद होगा, वो दिन जब मैं तुम्हें ट्यूशन पढ़ाया करता था। तुम्हारी वो मासूम सी बेताबी, वक्त होने से पहले ही सब कुछ समेटकर तैयार हो जाना, और फ़िर दरवाज़े की चौख़ट पर खड़े होकर चुपचाप मेरे आने की मुंतज़िर रहना,वो मंज़र आज भी मेरी पलकों पर किसी तस्वीर की तरह सजा हुआ है। कभी किताबों के बीच फ़ूल रखना, कभी छोटे-छोटे कागज़ों पर मोहब्बत के पयाम लिखना, और शाम ढले चाय के कप उठाए उन अनगिनत बातों का सिलसिला… वो हसीन लम्हे हमारी ज़िंदगी की सबसे कीमती पूँजी हुआ करते थे।

लेकिन वक्त ने कैसी करवट ली है! अब मुक़द्दर की वो लकीरें बदल चुकी हैं, और हालात हमें कहाँ से कहाँ खींच लाए हैं। आज तो ज़िंदगी की रफ़्तार इतनी तेज़ हो चुकी है कि साँसें भी जवाब देने लगती हैं। अब किसी का इंतजार करने का हौसला बाक़ी नहीं रहा, क्योंकि वक्त ने फ़ासले इतने बढ़ा दिए हैं कि अब इंतज़ार की भी कोई सूरत नहीं, अब तो सीने में सिर्फ़ एक तड़प है, और वो बीते हुए लम्हे हैं जो जब भी याद आते हैं, आँखें नम कर देते हैं। चारों तरफ़ तेज़ रफ़्तार गाड़ियों का शोर है, ऊँची-ऊँची इमारतों का ऐसा जंगल है जहाँ खुली हवा में साँस लेना भी मुहाल है,एक ऐसी घुटन है जो रूह तक को जकड़े हुए है।

अब तो बस एक टूटा हुआ दिल है, जो दर्द की इंतहा के साथ सीने में सिर्फ़ धड़क रहा है। पता नहीं अब तुम्हारा ठिकाना कहाँ है, कौन सा नया शहर तुम्हें रास आया है? मगर इस टूटती हुई साँसों और बिखरे हुए वज़ूद के साथ भी, दिल के किसी कोने में तुम्हारी वही पुरानी याद आज भी आबाद है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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