पति की लंबी उम्र के लिए नहीं अपने रिश्ते की लंबी उम्र के लिए करें करवाचौथ का व्रत
करवा चौथ का दिन था। व्रत होने के कारण घर में ज्यादा काम नहीं था, सो सोशल मीडिया की पोस्ट देखने बैठ गई। हर तरफ एक ही सवाल के अलग-अलग रूप दिखाई दे रहे थे—पत्नी के भूखे रहने से पति की उम्र कैसे बढ़ जाती है? कुछ लोगों ने तो व्यंग्य करते हुए इसे पति की लंबी उम्र का रिचार्ज तक बता दिया था।
ऐसी ही कई पोस्ट और रील देखने के बाद मेरे मन में भी एक सहज-सा प्रश्न उठा—क्या वाकई करवा चौथ का व्रत करने से पति की उम्र बढ़ती है? या इस त्योहार के पीछे कोई दूसरा भाव भी है, जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं?
जिज्ञासु मन जब सोच की गहराइयों में उतरता है, तो कई बार परंपराओं के भीतर छिपे अर्थ नए रूप में सामने आने लगते हैं।
मुझे महसूस हुआ कि करवा चौथ का असली महत्त्व पति की उम्र बढ़ाने के किसी चमत्कार में नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम को फिर से जगाने में हो सकता है। यह त्योहार उनके रिश्ते में स्नेह, आत्मीयता और आपसी जुड़ाव बढ़ाने का एक अवसर बन सकता है।
पत्नी पूरे दिन भूखी-प्यासी रहकर पति की लंबी उम्र की कामना करती है। चाँद देखने के बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती है। पति उसे उपहार देता है। इन सारी रस्मों के बीच कहीं न कहीं उसका प्रेम, समर्पण और अपनापन झलकता है।
दूसरी ओर, जब पति अपनी पत्नी को अपने लिए व्रत करते हुए देखता है, तो उसके मन में भी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव जाग सकता है। दिनभर की थकान के बावजूद सोलह शृंगार किए पत्नी जब उसके सामने आती है, तो संभव है कि दोनों अनायास ही अपने विवाह के शुरुआती दिनों में लौट जाएँ।
वह प्रेम, जो रोजमर्रा की भागदौड़, जिम्मेदारियों, बच्चों, नौकरी और घरेलू उलझनों के बीच कहीं दब-सा गया था, फिर से सिर उठाने लगता है। पुरानी यादें ताजा होती हैं, आँखों में अपनापन उतरता है और रिश्ते में कुछ नया-सा महसूस होने लगता है।
मुझे करवा चौथ का यही मनोवैज्ञानिक पक्ष सबसे अधिक अर्थपूर्ण लगता है।
धार्मिक मान्यताएँ और कथाएँ अपनी जगह हैं, लेकिन आज के संदर्भ में इस त्योहार को देखने का मेरा नजरिया कुछ अलग है। मुझे लगता है कि इसका वास्तविक सौंदर्य उस भाव में है, जो दो लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाता है।
चाँदनी रात में जब पति-पत्नी साथ बैठकर चाँद निकलने का इंतजार करते हैं, तो चाँद तो अपने समय पर निकल ही आता है। लेकिन उस इंतजार के दौरान उनके भीतर छिपा हुआ प्रेम भी तो बाहर आता है! वे कुछ पल एक-दूसरे के लिए निकालते हैं, एक-दूसरे को देखते हैं और शायद यह महसूस करते हैं कि जीवन की तमाम व्यस्तताओं के बीच उनका रिश्ता आज भी कितना महत्त्वपूर्ण है।
लेकिन यहाँ एक प्रश्न और है।
यदि इस पूरे त्योहार में केवल पत्नी ही भूखी रहे, केवल वही पति की लंबी उम्र की चिंता करे, केवल वही अपने प्रेम का प्रमाण दे और पति की ओर से उसके प्रति कोई संवेदना, देखभाल या सहभागिता न हो, तो फिर इस त्योहार का उद्देश्य अधूरा नहीं रह जाएगा?
प्रेम में परीक्षा केवल एक व्यक्ति की क्यों हो? समर्पण का प्रमाण केवल पत्नी ही क्यों दे? पति भी तो पत्नी के सुख, स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना कर सकता है। वह भी उसकी भावनाओं को समझ सकता है, उसके साथ खड़ा हो सकता है और उसकी देखभाल कर सकता है।
यह जरूरी नहीं कि दोनों एक ही तरह से व्रत रखें या एक ही रस्म निभाएँ। जरूरी यह है कि दोनों एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें और अपनी-अपनी तरह से प्रेम व्यक्त करें।
आखिर पति की उम्र बढ़ाने के लिए पत्नी का भूखा रहना वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है, लेकिन एक-दूसरे की देखभाल, भावनात्मक सहयोग और स्वस्थ जीवनशैली दोनों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसलिए मेरे लिए करवा चौथ केवल पति की लंबी उम्र की कामना का पर्व नहीं, बल्कि रिश्ते की लंबी उम्र के बारे में सोचने का अवसर भी है।
पति-पत्नी यदि मिलकर अपने रिश्ते को समय दें, एक-दूसरे की परेशानियों को समझें, मनमुटाव को बातचीत से सुलझाएँ और जीवन की जिम्मेदारियों में साझेदार बनें, तो उनके रिश्ते में प्रेम और विश्वास लंबे समय तक बना रह सकता है।
क्योंकि बात केवल उम्र के रिचार्ज की नहीं है, साथ बिताए जाने वाले जीवन की भी है।
रिश्ते की उम्र लंबी होगी, तो उस रिश्ते को जीने वालों का जीवन भी प्रेम, संतोष और अपनत्व से समृद्ध होगा।
और शायद करवा चौथ का सबसे सुंदर अर्थ भी यही है—चाँद की रोशनी में केवल पति की लंबी उम्र की कामना न हो, बल्कि दोनों के प्रेम को भी एक नई रोशनी मिले।
— प्रज्ञा पाण्डेय मनु
