करवाचौथ : प्रेम, समर्पण और विश्वास
व्रत से बढ़कर प्रेम है, प्रेम बड़ा विश्वास।
दो मन जब मिलकर चलें, महके जीवन-वास॥
चंदा से अरदास कर, माँगे सुखी सुहाग।
साजन की मुस्कान में, सजनी का अनुराग॥
भूख-प्यास सहती रही, मन में रखकर आस।
साजन की लंबी उमर, जीवन का विश्वास॥
चूड़ी, बिंदी, मेहँदी, कर सोलह शृंगार।
पिया प्रेम की छाँव में, सजता है संसार॥
रिश्ते केवल व्रत नहीं, समझें मन के भाव।
प्रेम तभी जीवित रहे, जब हो सही लगाव॥
सुख-दुख के इस राह में, थामे रहना हाथ।
जीवन की हर धूप में, बनना सच्चा साथ॥
चाँद निहारे चाँदनी, पिया निहारे प्रीत।
प्रेम सुधा बरसे हृदय, मधुर बने हर रीत॥
करवा में जल भर दिया, मन में भरी मिठास।
साथ तुम्हारा मिल गया, पूरी हुई तलाश॥
केवल पूजा से नहीं, रिश्तों का उत्थान।
सम्मानित हो भावना, तभी बनते महान॥
सजनी के उपवास का, रखना साजन मान।
उसके मन की बात को, देना उचित स्थान॥
महँगे उपहारों नहीं, रिश्तों का आधार।
बस दो मीठे बोल से, खिलता है संसार॥
चाँद छिपे बादल तले, अटल रखे विश्वास।
प्रेम हृदय में हो अगर, पूरी हर इक आस॥
रूप-सजावट क्षणिक है, सत्य प्रेम अनमोल।
मीठे वचनों से खुलें, रिश्तों के सब बोल॥
करवा चौथ सिखला रहा, प्रेम भरा व्यवहार।
एक-दूजे के मान से, महके घर-संसार॥
साजन केवल चाँद ना, सजनी का सम्मान।
संग-संग दोनों बाँट लें, जीवन के तूफान॥
व्रत की गरिमा तब बढ़े, जब हो मन में नेह।
एक-दूजे के दुख मिटें, मिटे सभी संदेह॥
नारी का भी मान हो, पुरुष करे सम्मान।
समानता के भाव से, सुंदर बने जहान॥
रीति-रिवाजों के तले, खो ना जाये भाव।
प्रेम सहजता से पले, मन में सौरभ चाव॥
करवा चौथ का पर्व है, रिश्तों का त्योहार।
प्रेम, भरोसा, त्याग से, महके घर-परिवार॥
नारी के त्यागों तले, पलता घर-संसार।
उसके हिस्से भी रहे, खुशियों का उपहार॥
जीवन की हर साँझ में, प्रेम रहे आबाद।
साथ तुम्हारा पा सकूँ, यही करूँ फरियाद॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
