यादों के झरोखों से निकला एक अफ़साना
वक्त की धूप-छांव और पगडंडियों से गुजरते हुए ज़िंदगी कब एक ऐसे मोड़ पर आ पहुँचती है, जहाँ सिवाय अहसासों और यादों के कुछ बाक़ी नहीं रहता, इसका पता ही नहीं चलता। ऐसा लगता है मानो कल की ही बात हो जब आँखों में सुनहरे सपने और सीने में अनगिनत अरमान मचलते थे। आज जब मुड़कर पीछे देखते हैं, तो वक्त की गहरी परतों में कई आरज़ूएँ दफ़न नजर आती हैं। मगर उनकी खुशबू, उनका नशा और वो पुराना अहसास आज भी दिल के किसी कोने में धड़क रहा है।
“चालीस साल की उम्र में पीछे मुड़कर देखना… कभी कभी रात के आखिरी पहर कोई पुरानी याद दरवाजा खटखटाती है…”हमारे दिल पर एक गहरी दस्तक होती है,
रात के सन्नाटे में जब चारों तरफ खामोशी होती है, तो अचानक कोई अनसुनी सी आहट दिल को झकझोर जाती है। ऐसा महसूस होता है कि हमारे भीतर बैठा वो पुराना शख्स आज भी ज़िंदा है,वही शख़्स जो पुरानी गलियों में दोस्तों के साथ बेपरवाह घूमना चाहता है, जो खुलकर हँसना चाहता है और जो किसी अपने के पास बैठकर दिल की गहराइयों से बातें करना चाहता है।
शायद हम उम्र से बूढ़े नहीं हुए हैं, बस ज़िंदगी की इस अंधी दौड़ और ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबकर अपने उस मासूम व ज़िंदादिल वज़ूद से थोड़े दूर ज़रूर हो गए हैं, जो छोटी-छोटी और मामूली सी बातों पर भी खिलखिला कर ख़ुश हो जाया करता था।
सबसे ख़ूबसूरत और थोड़ा सा टीस भरा हिस्सा वो यादें हैं, जो किसी ख़ास चेहरे से जुड़ी हैं। ज़िंदगी के इस सफ़र में जब अतीत के झरोखों से झाँकते हैं, तो वह लड़की बहुत शिद्दत से याद आती है। उसके होने भर से जिंदगी में जो बहार हुआ करती थी, आज उसकी सिर्फ़ परछाइयाँ बाक़ी हैं।
उसके साथ बिताए वे पल, वो खामोश निगाहें, और वो अधूरा अफसाना,भले ही वक्त के समंदर में कहीं खो गया हो, लेकिन उसका असर आज भी रूह में उतरा हुआ है। कुछ यादें आँखों को नम ज़रूर कर जाती हैं, मगर वे दिल को यह सुकून भी देती हैं कि हमने अपनी ज़िंदगी में कभी बेहद ख़ूबसूरत दिन भी गुज़ारे थे।
माजी (अतीत) की खूबसूरती सिर्फ़ इस बात में नहीं है कि वह बीत गया, बल्कि असली ख़ूबसूरती तो इसमें है कि हम आज भी उन बीते हुए लम्हों को याद करके मुस्कुरा सकते हैं।
दफ़न हुई आरज़ूओं के मलबे से निकालकर, जब इन अहसासों को शब्दों का जामा पहनाया जाता है, तो यह सिर्फ़ एक डायरी के पन्ने नहीं रहते, बल्कि एक मुकम्मल अफ़साना बन जाते हैं,एक ऐसा अफ़साना जो हर उस शख़्स की दास्तान है जिसने शिद्दत से किसी को चाहा है और जिंदगी को उसकी पूरी गहराई के साथ जिया है
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़
