गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुझको हंसने का बहाना दे दे।
फिर वही वक्त पुराना दे दे।।
बैठ पहलू में मेरे आकर फिर।
बाद मुद्दत के रिहाना दे दे।।
पल दो पल साथ तेरे जी लूं मैं।
तू अगर दर्द दिवाना दे दे।।
चूम लूं तेरी पेशानी यारा।
तोहफा कोई सुहाना दे दे।।
बन के बादल तू बरस जा जम के।
दर्द का कोई तराना दे दे।।
रात भर सो न सकूं मैं हमदम।
कोई तो ज़ख़्म ये जाना दे दे।।
यूं उठा कर न ले जाए कोई।
हाथ ‘प्रीती’ के बयाना दे दे।।

— प्रीती श्रीवास्तव

*प्रीती श्रीवास्तव

पता- 15a राधापुरम् गूबा गार्डन कल्याणपुर कानपुर

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