रिश्तों को सहेजती नारी
आज भी कहीं… दूर गावों में आधुनिकता और दिखावे से दूर दिखते हैं आत्मीयता से भरे रिश्ते और उन रिश्तों
Read Moreआज भी कहीं… दूर गावों में आधुनिकता और दिखावे से दूर दिखते हैं आत्मीयता से भरे रिश्ते और उन रिश्तों
Read Moreलॉकडॉउन में घर बैठे – बैठे बोर हो चुकी थी वो । सोचा चलो थोड़ी तफरी कर ली जाए।
Read Moreमां तू है ममता की मूरत , तुझसे मिलती है मेरी सूरत । तेरे आंचल में बीता बचपन , तुझसे
Read Moreकुछ खोजती आँखे, बात करने का अलग ही अंदाज – जाने कब तुम से प्यार हो गया, खुद मुझको ही
Read Moreसूरज के चहूँ ओर, घूमें धरती। वैसे ही तुम… मेरी हर रचना का, केन्द्र बिन्दु बन जाते हो। हर लफ्ज,
Read More