अपनी धरती
कहते हैं सब कि … अपनी “धरती” रहने लायक अब बची ही नहीं । तो… हे कोलंबस ढूंढो नई
Read Moreभागीरथ के तप का प्रतिफल, *जटाशंकरी* कहलाई *शिवाया*। जहृनु ऋषि की पुत्री *जाह्नवी* ने, *देवनदी* का रुप अपनाया।। *उत्तरवाहिनी*
Read Moreमहाज्ञानी थे ऋषि मनीषी जल की महिमा का था उनको ज्ञान । जरूरत को जोड़ कर व्रतोपासना से हमें करना
Read Moreभूल प्रतिस्पर्धा और परीक्षाओं का आतंक फिर से इक बार… उधार ही सही, पर किसी से, उन्मुक्त हंसी ले लेते
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