नारी
नारी हूं मैं शक्ति हूं मैं ईश्वर की अभिव्यक्ति हूं कभी निर्मल, तो कभी ज्वाला हूं मैं संस्कारों की शाला
Read Moreहै माथे चन्द्रमा हलाहल शिव कंठ में अर्धनारीश्वर सृष्टि पालनकर्ता है भोला शंकर अन्तर्यामी महिमा न्यारी शांत करे चित्त भक्तों
Read Moreकौन कहता है कि किस्से,,, चाहत मुहब्बत और तेरे-मेरे प्यार के हैं अब बस कुछ पन्नों में सिमट गए
Read Moreदिखावटी सैकुलरता दूर देश जब हुआ अन्याय, और इक “अश्वेत” की जान गई । सात समंदर पार,,, इस मेरे देश
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