भक्ति या आडंबर
वृंदावन की संकरी गलियों में धूप आग उगल रही थी। मंदिर के सामने, आठ साल की गुड़िया माथे पर पसीना
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Read More“सुहाना, आंटी जी किधर हैं? गांव वापिस चली गईं क्या?” सुधा जी को घर में न देख सुहाना की सहेली
Read More-1-न उँगलियों में हलचल /न था कोई निशान /लगता है.. आज फिर डस गया /विश्वास के किसी को /छुपा हुआ…आस्तीन
Read More“माँ ! सब चीजें ध्यान से देख लो। कोई कमी न रह जाए। ” पिता के श्राद्ध की तैयारी में
Read Moreलोगों की दोहरी मानसिकता पर बहुत गुस्सा आ रहा है। ऐसा लगता है जैसे दिमाग़ फट जायेगा। फेसबुक, ट्विटर हर
Read Moreसब कुछ है, पर न जाने क्यों हमारा ही घर खुशियां तलाशता रहता है, मन ही मन रमा सोच रही
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