क्षणिकाएं
अरमान अधूरे दिल में रहे/ दीदार को दिल यह तरसा है/ सुलगी हूं फिर मैं विरह में / और… आंखों
Read Moreदादी यूँ तो सोना और उसके फुफेरे भाई मोहित दोनों से ही स्नेह करती थी, लेकिन उनका मोहित की तरफ
Read More“विकास” का बोझ, धरती से और सांसों का बोझ कंधे पर जब उठाया न गया, मासूम ने धरती पर “जीवन”
Read Moreबात उस समय की है जब मेरा दसवीं कक्षा का रिजल्ट आने वाला था। उन दिनों रिजल्ट स्कूल में आता
Read More“अरे रीमा, जरा चेक साइन कर देना। अमाउंट मैं भर लूंगा । दो-तीन लाख तो होगा ना तुम्हारे एकाउंट में
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