मेरे अल्फ़ाज़
आज मेरे अल्फ़ाज़ मुझसे खफा हो गए । खिड़की के रास्ते दफा हो गए । कितने मासूम लगते मुंह के
Read Moreआज मेरे अल्फ़ाज़ मुझसे खफा हो गए । खिड़की के रास्ते दफा हो गए । कितने मासूम लगते मुंह के
Read Moreद्वारे को दीप भी देहरी उदास। तेरे आगमन की आंगन को आस। आओगे हे दिल में आस। बांट लोगे दुःख
Read Moreभईयाजी नेता जी एक ही बड़का दांव जानते हैं ,वो हैं पैंतरे बाजी , चुनाव के बाद एक साल तक
Read More“सुन भाया एक बात बताओ । बड़े उदास लग रहे हो।” “भंवर जी के बताऊ, बेटा कह रहा था पिता जी
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