मुक्तक
अँधियारे को मत धिक्कारो, दीपक एक जलाओ तुम। सोच बुराई की राहों को, उचित राह अपनाओ तुम। बुरे काम का
Read Moreछब्बीस जनवरी को फिर से मनाया जाएगा गणतन्त्र दिवस। ठीक वैसे ही जैसे पाँच महीने पहले मनाया गया था स्वाधीनता
Read Moreसाहित्य का मूल अभिप्राय है सहित की भावना का विकास करना। वही मनुष्य जीता हुआ माना जाता है जिसमें साहित्य
Read Moreप्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के राष्ट्रवादी महानायक बाबू वीर कुँवर सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। 26 अप्रैल 1858 को
Read Moreसम्बंधों के शेयर बाजार में हर बार लगाता रहा अपनी सकल जमा पूँजी बिखरती हिम्मत को जुटाकर चकनाचूर हौसलों को
Read Moreसुबह जगाने आता सूरज, शाम सुलाने आता चंदा। गर अदला-बदली हो जाए, झूम – झूमकर गाए बंदा।। पता नहीं सूरज
Read Moreजब से नारी को नारी का, सम्बल मिलना शुरु हुआ। वसुधा से उठकर नारी ने, हाथों से आकाश छुआ।। पग
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