गुरु सब धन की खान रे
गुरु से शिक्षा गुरु से दीक्षा, गुरु सब धन की खान रे । गुरु जैसा नहिं दूजा कोई, बात हमारी
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Read Moreसंत कबीर की उक्ति “दु:ख में सुमिरन सब करै….” आज भी प्रयोजन युक्त है। दुखिया है कौन! कबीर बाबा बताते
Read Moreकब तक झूठे इतिहासों में, सच्चाई झुठलाएँगे, कब तक अमर शहीद हमारे, आतंकी कहलाएँगे। माना सत्य – अहिंसा से ही,
Read Moreहे देवकी-वसुदेव! क्या अभी भी तुम इतने लाचार हो! जिसने तुम्हें कैद से बाहर किया माँ-बाप का दर्जा दिया जन्मते
Read Moreचलो अयोध्या धाम, विराजेंगे अपने श्रीराम। कभी राम झुठलाये जाते। नकली चरित बताये जाते। आतंकी बाबर के सम्मुख- मनगढ़ंत
Read Moreथाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधा लो राखी। इस राखी में छुपी हुई है, अरमानों की साखी।। चंदन, रोली, अक्षत,
Read Moreसूरज अपनी रश्मिपुंज से, जल का वाष्पन करता है। धीरे – धीरे नभ में लाकर, हवा संग में धरता है।
Read Moreसांस्कृतिक पतन के दौर में पूर्वजों को नाकाम, असफल, अयोग्य, अकर्मण्य, अप्रगतिशील और न जाने क्या- क्या कहने का चलन
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