कितना बदल गया परिवेश
वेलेंटाइन के चक्कर में अजब- गजब है वेश। पुलवामा की कुर्बानी को भूल रहा है देश।। सही- गलत के मिश्रण
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Read Moreनिर्वाचन के महासमर में तूँने बहुमत पाया है। झाड़ू लेकर इधर से उधर कचरा खूब उड़ाया है। लोकतन्त्र के शेर
Read Moreनैन कटारी मार मुझे घायल कर जाती हो बोलो। रातों में सपनों में आकर चैन चुराती हो बोलो। तेरी
Read Moreपरिवर्तन का जोश भरा था, कुर्बानी के तेवर में। सब कुछ हमने लुटा दिया था, आजादी के जवर में।। हम
Read Moreयह कल्पना करना ही भयावह लगता है कि अगर शिक्षा न होती तो क्या होता? अगर शिक्षा न होती तो
Read Moreचल रे! मतदान करें देशप्रेम को आगे रख- सबका आह्वान करें, चल रे! मतदान करें। लोकतन्त्र में हाथ बँटा- मत
Read Moreजनतन्त्र जनतामय होता है। जनता के बीच से जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि जननायक, जननेता, जनसेवक या ऐसे ही बहुतेरे
Read Moreमिला बहुत खोया तनिक, प्यारा वर्ष उनीस। करो पूर्ण हर
Read Moreहे मानुस! तूँ सभी जीव में ज्ञानी है – विज्ञानी है। जैव – जगत में नहीं दूसरा कोई तेरा सानी
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