हे पुरुष! पुरुषत्व तेरा है छलावा
हे पुरुष! नारियों के हेतु सौ – सौ वर्जनाएँ और अपने हाथ सौ अधिकार लेकर, न्याय के सर्वोच्च पद को
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Read Moreआजादी के अमृत महोत्सव के परिप्रेक्ष्य में गुमनाम पूर्वजों की यशगाथा पर आधारित राष्ट्रवादी पुस्तक इनसे हैं हम की लोकप्रियता
Read Moreस्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते। जी हाँ, राजा की पूजा उसके देश में होती है वो भी भय से
Read Moreसोनपुर का मेला जो कभी आजादी की योजना-स्थल के रूप में जाना जाता था, अब से आवाज दबाने के रूप
Read Moreहाँ, हम भेड़ हैं हमारी संख्या भी बहुत अधिक है सोचना-विचारना भी हमारे वश में नहीं न अतीत का दुःख
Read Moreपूर्वोत्तर भारत का कण-कण जिनकी उपस्थिति का भान कराता है वे हैं दृष्टि, संवेदना और कलम के धनी श्री वीरेन्द्र
Read Moreकृष्ण की गीता पुरानी हो गई है, या कि लोगों की समझ कमजोर है। शस्त्र एवं शास्त्र दोनों हैं जरूरी,
Read Moreहम किसी पर अपनी मामूली सम्पत्ति तक नहीं छोड़ते और अनमोल बच्चे छोड़ देते हैं। है न आश्चर्यजनक! लेकिन सच
Read Moreदुकान और पकवान दोनों मानव से जुड़ी अति प्राचीन काल से सतत चलने वाली आवश्यकताएँ हैं। दुकान पर माँग –
Read Moreकल्पना हकीकत से अधिक आकर्षक होती है। कल्पना हकीकत से अधिक दुखदायी भी होती है। कल्पना चूँकि कल्पना है, हकीकत
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