खामोशी….
जुबां खामोश पर कहने को बात बहुत है गुमसुम का लिबास ओढ़े लब पर खलबली बहुत है बयां हो रही
Read Moreये तन्हाईयाँ ढूंढ ही लेती है तेरा पता छा जाता तू मेरे मन पे इसतरह सांसों की आहट में जिंदगी
Read Moreकौन है ये चौकीदार किसे कहते है चौकीदार यह सिर्फ एक नाम नहीं एक पहचान है आत्मसम्मान है देश की
Read Moreनदियां भी तो चलती है पिघलती है उद्गम से निकलती है पहाड़ों से गिरती है रास्ते ऊबड़ – खाबड़ है
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