कविता – पिता जी
मैंने जब होश संभाला बचपन की सरिता पार कर चुका था समझ को छोटे-छोटे पंख लग चुक थे पिजा जी
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Read Moreमाँ तुझ को मैं सीस झुकाता हूँ तेरी फूलों जैसी गोदी में। तेरी ठंडी मीठी लोरी में। श्रद्धा वाले फूल
Read Moreतेरे जैसा दुनियां में इन्सान नहीं उर्वर भूमि के मालिक उद्यम कृषक सुन। नींव के सृजक प्रभाकर श्रमिक सुन। तेरे
Read Moreहम कुछ मित्र नौकरी करने के लिए प्रति दिन ट्रेन पर लगभग 60 किलोमीटर का सफर तय करके दूसरे शहर
Read Moreप्रसन्न, आनन्दित, हर्षित, पूर्णतया संतुष्ट, जो अपने या किसी अन्य द्वारा किए हुए कार्य से सुख तथा संतोष का अनुभव
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