गीतिका
सुमन आज भौंरों को रिझाने लगे। झूमते – झूमते पास आने लगे।। लाज को छोड़ कलियाँ खिलीं हैं बहुत, देख
Read Moreबैंगन जी की हुई सगाई। भिंडी जी ने खुशी मनाई।। मन ही मन आलू गुर्राया। कैसे इसने उसे पटाया।। मुझसे
Read Moreरंग – रँगीली होली आई। छटा – सुहानी ब्रज में छाई।। अपनी -अपनी लें पिचकारी। रंग भरी मारें सब धारी।।
Read Moreगांधी जी के तीन बंदर कुछ महत्त्वपूर्ण संदेश देते हैं।जो बंदर अपनी आँखों को अपने हाथों से बंद किए हुए
Read Moreपृथ्वी लोक में मानव के चार पुरुषार्थों के अंतर्गत धर्म के बाद ‘अर्थ का’ दूसरा स्थान है। धर्म किसी के
Read Moreझोली भर -भर रंग की,आया फागुन मास। सुमनों पर भौंरे उड़े,लेकर मधु की आस।। कोकिल कूके बाग में,विरहिन के उर
Read Moreसूरज के हिस्से दिन आया। निशि-अँधियारा शशि ने पाया। सूरज देता तेज उजाला। चमकाता चंदा तम काला।। संग उषा के
Read Moreआज हम सभी ‘खूँटा- युग’ में साँस ले रहे हैं। प्रत्येक किसी न किसी खूँटे से बँधा हुआ है।जैसे रसायन
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