बालगीत
देखो बादल बरस रहे हैं। पेड़, लताएँ सरस रहे हैं।। ठंडी हवा साथ में लाए। बरस रहे मन को अति
Read Moreमानवता का मातम छाया , कैसे गीत सुनाएँ हम। मानव रक्त पिए मानव का, घर -आँगन में काला तम।। भगवानों
Read Moreमैं लाल गगरिया पानी की। माटी से बनी कहानी भी।। जिस कुम्भकार ने मुझे गढ़ा। नव स्वेद कणों का पाठ
Read Moreजब से मुँह पर लगा मुसीका। रहता सबको ध्यान उसीका। होठों की मुस्कान छिपाई। यह बचाव की अटल दवाई।। रोग
Read Moreलाल – लाल तरबूजा आया । मैंने जी भर कर वह खाया।। गर्मी का मधु फल तरबूजा। मीठा ऐसा ज्यों
Read Moreहम सभी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि लोटा तो लोटा ही है।यदि लोटे को परिभाषित किया जाए तो
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