कुण्डलिया : यौवन के दिन चार
-1- बचपन के दो नयन में,ले भविष्य आकार। वर्तमान देखें युवा, जरा अतीताभार।। जरा अतीताभार, देखता बीते कल को। चखता
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Read Moreमुझे याद है माँ की लोरी। माँ थी मेरी कितनी भोरी।। बिस्तर जब गीला हो जाता। रोकर अपना कष्ट बताता।।
Read Moreअपनी -अपनी सबको प्यारी है। अब चाहे वह घरवाली हो अथवा इज्जत। हमारे यहाँ घरवाली को इज्जत का पर्याय भी
Read More-1- गौ माँ!गौ माँ!!कर रहे, सुलभ न चारा घास। मारी-मारी फिर रहीं,गौ माँ आज निराश।। गौ माँ आज निराश, सड़क
Read Moreमोटा जी ने पिल्ला पाला। लंबे भूरे बालों वाला।। रोज सैर को पिल्ला जाता। तनकर चलता शान दिखाता। पट्टा गले
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