व्यंग्य – मौसम शुरू हो गया है
सबका अपना एक मौसम होता है। बिना मौसम के कुछ भी अच्छा नहीं लगता।आज पर्यावरण दिवस से पर्यावरण मित्रों का
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Read Moreगर्मी आई ! गर्मी आई!! स्वाद भरी सौगातें लाई। बाड़ी में महके- ख़रबूज़े। लाल शहद – से हैं तरबूजे।। खीरा
Read Moreजंगल की तुम सुनो कहानी। सुना रही थी मेरी नानी।। हथिनी हाथी पर चिंघाड़ी। फ़टी हुई है मेरी साड़ी।। नई
Read Moreबाहर से देखने पर तो वह आदमी ही दिखाई पड़ता है। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत ही नज़र आती है। उसकी
Read Moreकितने अद्भुत अपने पैर! नहीं किसी से करते बैर।। सबको मंज़िल तक पहुँचाते। ये दुनिया भर को करवाते ।। मेला
Read More1 जैसी मन की सोच है,वैसे ही फल फूल। सोचा अगर बबूल है,चुभें देह में शूल।। चुभें देह में शूल
Read Moreदस दिन तक देश को ‘घरबंदी’ में रहने के बाद कुछ चौंकाने वाले निष्कर्ष निकलकर आए हैं, जिन्हें जानना और
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