ईंटों से घर बना हमारा।
ईंटों से घर बना हमारा। विद्यालय भी बनता प्यारा।। मिट्टी को साँचे में भरते। सुघड़ ईंट का सर्जन करते।। भट्टे
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Read Moreसबका अपना -अपना मौसम होता है। जिसमें सब अपने मन की करते हैं। जब मौसम की जवानी आती है। सब
Read Moreभौंका कुत्ता एक जब , हुआ गली में शोर। भौं भौं भौं मचने लगी, हुई भयावह भोर।। हुई भयावह भोर,
Read Moreमैं हूँ गोल टमाटर लाल। करता लाल तुम्हारे गाल।। पेरू से मैं भारत आया। योरूप में भी नाम कमाया।। लव
Read Moreचींटी जब पथ पर बढ़ती है। ऊँचे पर्वत पर चढ़ती है।। चढ़ती फिर नीचे गिर जाती। गिर गिर कर मंजिल
Read Moreआदमी ही आदमी को छल रहा है। आदमी से आदमी क्यों जल रहा है।। मान – मर्यादा हुई तार –
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