ग़ज़ल
अफ़वाहों का बाज़ार गरम है। हुआ आदमी बिना शरम है। उनको लाले पड़े जान के , फैलाते कुछ यहाँ भरम
Read Moreसूरज गोल चंदा गोल। धरती , अंबर , तारे गोल।। गाड़ी के पहिए हैं गोल। गेंद हमारी सबसे गोल।। मुरगी
Read Moreअब कोरोना का रोना है, बद नफरत का भी दंगा है। आदमी आदमी की खातिर, हो गया आज बदरंगा है।।
Read Moreनकली सोना असली सोने से कुछ ज़्यादा ही चमक का स्वामी होता है।लेकिन जब नकली से असली पीछे छूटने लगे
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