कुण्डलिया – नारी क्यारी बाग की
(1) कितना वहशी हो गया , देखो रे इंसान। लाज – हया धो पी गया , दिखती कोरी शान।। दिखती
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Read Moreसही समय विद्यालय जाते। बच्चे वही सफलता पाते।। जल्दी जगना जल्दी सोना। स्वस्थ देह दिमाग भी होना।। गुरु जी हमें
Read Moreबात -बात में शपथ लेने की बात करना कुछ लोगों का स्वभाव होता है। अपनी सौगंध , आपकी सौगंध, गंगा
Read Moreजो मेरा मनमीत बन गया। जीवन का संगीत बन गया।। जीवन की राहें रपटीली। उबड़ – खाबड़ और कँटीली।। हर
Read Moreसुबह हुई तो बाँग लगाता। मुर्गा गीत कुकड़ कूँ गाता।। कहता हमसे जागो प्यारे। आलस छोड़ो सुबह सकारे।। अपने साथ
Read Moreराम – गंगा में सुधा का सार है। जो नहाया उसका नित उद्धार है।। सब जगह रमता वही तो राम
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