गीत – पायल की रुनझुन
पायल की रुनझुन की अपनी बोली है। कानों में मधुरस की प्याली घोली है।। कोयल फिर से बोल उठा है
Read Moreपायल की रुनझुन की अपनी बोली है। कानों में मधुरस की प्याली घोली है।। कोयल फिर से बोल उठा है
Read Moreअपने – अपने सब लोग कहें, अपनों न दिखौ सिगरे जग माहीं। सब स्वारथ लागि जुहार करें, बस पेड़ ही
Read Moreमम्मी मुझे न बनना नेता। अब का नेता भी क्या देता।। पढ़-लिखकर मैं नाम कमाऊं। नित विद्यालय पढ़ने जाऊँ।। विद्यालय
Read Moreनेताजी का खेत है , अपना सारा देश। फ़सल उगाते साल भर, बदल – बदल कर वेश।।1। नेताजी के खेत
Read Moreनारद जी पृथ्वी पर भ्रमण करने के बाद नारायण ! नारायण !! उच्चारण करते हुए विष्णु लोक पधारे ,तो उनके
Read Moreजबरा मारे रोने भी न दे, खोल नहीं सकते अपना मुँह, गुनाह है बोलना सत्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कोई
Read Moreसमझदारी इसी में है कि हम लक़ीर के फ़कीर बने रहें। इससे सबसे पहला और बड़ा लाभ ये है कि
Read Moreअंधकार से प्रकाश की ओर जाना है, अन्तस् के तमस को मिटाना है, सद -भावनाओं के दिये भुवन भर में
Read Moreजब तक उर में रहे अँधेरा, दीप जलाने से क्या होगा! कुटिया-कुटिया हई न रौशन, महल सजाने से क्या होगा
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