कुण्डलिया – दिए जलाएँ नेह के
दिए जलाएँ नेह के , बिन बाती बिन तेल। दीवाली हर रोज़ है , जब हो मन में मेल। जब
Read Moreदिए जलाएँ नेह के , बिन बाती बिन तेल। दीवाली हर रोज़ है , जब हो मन में मेल। जब
Read Moreसजीं मंच पर सुंदर झाँकी। नौ रूपों में दुर्गा माँ की।। शैलसुता माँ वृषभ सवारी। ब्रह्मचारिणी तपती
Read Moreख़ुशी मनाएँ पीटें ताली। आने वाली है दिवाली।। राम लौट लंका से
Read Moreविधि की अद्भुत रचना प्यारी। चश्मा टेकन की तैयारी।। एक नाक दो कान बनाए। सूँघें खुशबू सुन भी पाएँ।।
Read Moreसबसे अच्छे और महान। अम्मा – बापू घर की शान।। पहले सबसे माँ की पूजा। नहीं पिता सम कोई दूजा।।
Read Moreअरे भाई! आप भी कैसी बात करते हैं ? भ्रष्टाचार दूर करो ! भ्रष्टाचार दूर करो !! ये तीन शब्द
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