गीत -राम -गंगा में सुधा का सार है
राम – गंगा में सुधा का सार है। जो नहाया उसका नित उद्धार है।। सब जगह रमता वही तो राम
Read Moreराम – गंगा में सुधा का सार है। जो नहाया उसका नित उद्धार है।। सब जगह रमता वही तो राम
Read Moreपायल की रुनझुन की अपनी बोली है। कानों में मधुरस की प्याली घोली है।। कोयल फिर से बोल उठा है
Read Moreअपने – अपने सब लोग कहें, अपनों न दिखौ सिगरे जग माहीं। सब स्वारथ लागि जुहार करें, बस पेड़ ही
Read Moreमम्मी मुझे न बनना नेता। अब का नेता भी क्या देता।। पढ़-लिखकर मैं नाम कमाऊं। नित विद्यालय पढ़ने जाऊँ।। विद्यालय
Read Moreनेताजी का खेत है , अपना सारा देश। फ़सल उगाते साल भर, बदल – बदल कर वेश।।1। नेताजी के खेत
Read Moreनारद जी पृथ्वी पर भ्रमण करने के बाद नारायण ! नारायण !! उच्चारण करते हुए विष्णु लोक पधारे ,तो उनके
Read Moreजबरा मारे रोने भी न दे, खोल नहीं सकते अपना मुँह, गुनाह है बोलना सत्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कोई
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