ग़ज़ल
हिंदी है मनभावन गंगा, हिंदी सुंदर सावन गंगा। हिंदी भाषा अजर- अमर है, हिंदी सदा सुहागन गंगा।। हिंदी सबकी
Read Moreमुँह का काम कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया लगता है। जब यह शुरू हो जाता है तो किसी की सुनना
Read Moreअपनी सारी कथा सुनाती। कहती ‘मैं पुस्तक कहलाती।।’ ‘मेरे अन्दर गीत कहानी। मेढक मछली नाना नानी।। रंग –
Read Moreआख़िर तो हम इंसान ही हैं न ! तो हम क्यों सुधरें? हम कोई देवता देवी तो हैं नहीं !
Read Moreनकल का भी अपना ही सुख है।हम बचपन से नकल करते -करते बड़े हो गए। छोटे थे तो अपने माता
Read Moreप्रकृति से दूर विकृति भरपूर, प्रकृति का साथ जीवनी -शक्ति का हाथ, प्रकृति की विकृति ही जगत, जगती सृजन सृष्टि,
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