ग़ज़ल
जो दिल ग़म से ख़ाली है।. उसकी रोज़ दिवाली है।। दिए सुकूँ के रौशन हों, उस घर सदा दिवाली है।
Read Moreसमझदारी इसी में है कि हम लक़ीर के फ़कीर बने रहें। इससे सबसे पहला और बड़ा लाभ ये है कि
Read Moreअंधकार से प्रकाश की ओर जाना है, अन्तस् के तमस को मिटाना है, सद -भावनाओं के दिये भुवन भर में
Read Moreजब तक उर में रहे अँधेरा, दीप जलाने से क्या होगा! कुटिया-कुटिया हई न रौशन, महल सजाने से क्या होगा
Read Moreदिए जलाएँ नेह के , बिन बाती बिन तेल। दीवाली हर रोज़ है , जब हो मन में मेल। जब
Read Moreसजीं मंच पर सुंदर झाँकी। नौ रूपों में दुर्गा माँ की।। शैलसुता माँ वृषभ सवारी। ब्रह्मचारिणी तपती
Read Moreख़ुशी मनाएँ पीटें ताली। आने वाली है दिवाली।। राम लौट लंका से
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