ग़ज़ल
राहबर आज ग़र भला होता। राहे – नेकी पे वो चला होता।। वो तो खुदगर्जियों में डूबा है, उसको नासेह
Read Moreविधि की अद्भुत रचना प्यारी। चश्मा टेकन की तैयारी।। एक नाक दो कान बनाए। सूँघें खुशबू सुन भी पाएँ।।
Read Moreसबसे अच्छे और महान। अम्मा – बापू घर की शान।। पहले सबसे माँ की पूजा। नहीं पिता सम कोई दूजा।।
Read Moreअरे भाई! आप भी कैसी बात करते हैं ? भ्रष्टाचार दूर करो ! भ्रष्टाचार दूर करो !! ये तीन शब्द
Read Moreमुँह का काम कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया लगता है। जब यह शुरू हो जाता है तो किसी की सुनना
Read Moreअपनी सारी कथा सुनाती। कहती ‘मैं पुस्तक कहलाती।।’ ‘मेरे अन्दर गीत कहानी। मेढक मछली नाना नानी।। रंग –
Read Moreआख़िर तो हम इंसान ही हैं न ! तो हम क्यों सुधरें? हम कोई देवता देवी तो हैं नहीं !
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