ग़ज़ल
आस्तीनों में छुपे साँप दग़ा देते हैं। खून अपनों का ज़माने में बहा देते हैं।। घर बनाने में बड़ी उम्र
Read Moreनकल का भी अपना ही सुख है।हम बचपन से नकल करते -करते बड़े हो गए। छोटे थे तो अपने माता
Read Moreप्रकृति से दूर विकृति भरपूर, प्रकृति का साथ जीवनी -शक्ति का हाथ, प्रकृति की विकृति ही जगत, जगती सृजन सृष्टि,
Read Moreअम्मा देखो वर्षा आई। रिमझिम रिमझिम बुँदियाँ लाई। हम नहाएँगे बाहर जाकर, सड़क खेत गलियों में आकर, दौड़
Read Moreपी -पीकर अपनी आँतें गला लीं। दिल का दिवाला निकाल दिया।जिगर का ज़िक्र ही क्या करें, वह भी बेचारा बे
Read Moreमानव जीवन मन से संचालित है। वही इस शरीर रूपी रथ का सारथी है। इस तथ्य को भगवान श्रीकृष्ण ने
Read Moreवर्ष 1973 में बी .एस सी. उत्तीर्ण करने के बाद मेरी इच्छा थी कि अपने प्रिय विषय वनस्पति -विज्ञान में
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