मतगयंत सवैया – होली विशेष
राग लिये अनुराग हि फागुन में फगवा अब गाय रही है डाल गुलाल कलाधर पे वृषभानु किशोरि रिझाय रही है
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Read Moreग्वाल बाल नंदलाल, ताल से मिला के ताल करते धमाल हैं गुलाल और रंग में छोरिया अहिर की पे ढंग
Read Moreप्रीत की सुधा सबको चाहिए मगर ग़म का विष कोई पीना नही चाहता इश्क में डूबने की बात करते बहुत
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