गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 10/08/202510/08/2025 ग़ज़ल अपनी हालत का जिम्मेदार समझते हैं मुझेयहां कुछ लोग गुनाहगार समझते हैं मुझे मैं अपनी मर्ज़ी से सांसें भी ले Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 08/08/202508/08/2025 ग़ज़ल बिछा कर रास्तों में एक चादर बैठ जाते हैंकहां जाएंगे वो जिनके मुकद्दर बैठ जाते हैं वक्त लेता है जब Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 08/07/202508/07/2025 ग़ज़ल दुआ देने में यारों को बड़ी तकलीफ होती हैखुशी से गम के मारों को बड़ी तकलीफ होती है मिटा देता Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 17/06/202517/06/2025 ग़ज़ल लकीरें हाथ की सारी मिटा दोआगाही की किताबें सब जला दो चाहें तो नहीं कुछ भी नामुमकिनचलो उठो ये दुनिया Read More
गीत/नवगीत *भरत मल्होत्रा 10/06/202510/06/2025 पुरुष हो तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है हर रोज़ घर से कमाने निकलना हैआग के दरिया से मुझको गुज़रना हैतमन्नाओं को अपनी खुद ही कुचलना हैजीने की Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 18/05/202518/05/2025 ग़ज़ल पहले झूठे ख्वाब संजोती रहती हैफिर अपनी तकदीर पे रोती रहती है फ़ूलों की चाहत है तो फिर क्यों दुनियाजब Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 02/05/202502/05/2025 ग़ज़ल हाल-ए-दिल सबको सुनाने की ज़रूरत क्या हैअश्क सरेआम बहाने की ज़रूरत क्या है ताल्लुक बोझ लगता हो तो आओ तोड़ Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 22/04/202529/04/2025 ग़ज़ल किसी को गले लगाए ज़माने गुज़र गएकोई गीत गुनगुनाए ज़माने गुज़र गए अहसास दर्द का क्यों कमतर नहीं होताजब दिल Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 21/03/202521/03/2025 समझते हैं किसी की बात को हम-तुम कहां और कब समझते हैंपर अपने काम की होती है तो हम सब समझते हैं Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 15/02/202515/02/2025 ग़ज़ल तीखे मोड़ हों जिसमें वो राह अच्छी नहीं होतीए मेरे दोस्त बिन माँगी सलाह अच्छी नहीं होती उड़ा देती है Read More