गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 15/12/2016 गज़ल चोट खाकर खिलखिलाता हूँ, टूटकर भी मैं मुस्कुराता हूँ, तू मेरा सब्र आज़माए जा, मैं तेरा जब्र आज़माता हूँ, आँख Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 13/12/2016 गज़ल इश्क से चोट लगती है हया से चोट लगती है, मेरे टूटे हुए दिल को वफा से चोट लगती है, Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 12/12/2016 गज़ल जितना तुमसे मैं दूर जाता हूँ, उतना तुमको करीब पाता हूँ, तेरी जुदाई के तसव्वुर से, दिये की लौ सा Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 03/12/201606/12/2016 गज़ल मेरी वफाओं से शिकायत है तो फिर यूँ ही सही, यही जो अंदाज़-ए-मुहब्बत है तो फिर यूँ ही सही, हर Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 01/12/2016 गज़ल ज़ख्म सारे भर गए पर दाग अब भी बाकी है, करनी थी तुमसे जो मुझे बात अब भी बाकी है, Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 30/11/2016 गज़ल कोई भी राह जीवन की मेरे तुम तक नहीं जाती, ना जाने क्यों मगर दीदार की हसरत नहीं जाती, हैं Read More
कविता *भरत मल्होत्रा 07/11/201608/11/2016 कविता आज फिर भंगार वाला, गली से गुज़र रहा था, रोज़ की तरह, आवाज़ देते हुए, कुछ टूटा फूटा सामान, भंगार Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 06/11/201606/11/2016 गज़ल दिल कहूँ दिलबर कहूँ दिलदार दिलरूबा कहूँकभी तुम्हें सनम कहूँ कभी तुम्हें खुदा कहूँ हमसफर तू हमकदम तू हमदम तू Read More
सामाजिक *भरत मल्होत्रा 06/11/2016 आत्महत्या की राजनीति “आत्महत्या” एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही शरीर में कंपकंपी सी होने लगती है। अपने ही हाथों अपने जीवन का Read More
धर्म-संस्कृति-अध्यात्म *भरत मल्होत्रा 30/10/2016 दीपावली “अप्प दीपो भवः” तथागत का ये संदेश सदियों बाद भी उतना ही सामायिक है जितना उनके समय में था। प्रत्येक Read More