कविता
बड़ी मासूमियत से, एक दिन उसने मुझे पूछा, मुहब्बत नाम है किसका, मुहब्बत कैसी होती है, कहा मैंने सुनो जानां,
Read Moreरहा नहीं अब शक कोई उनके नापाक इरादों पर ना करो भरोसा बार-बार हमसाए के झूठे वादों पर जितनी बार
Read Moreरिश्ता है ये सबसे न्यारा, सबसे अनुपम है ये बंधन, ॠणी रहूँगा सदा तुम्हारा, हे माँ तुझको मेरा वंदन, तुमने
Read Moreहवा लगी पश्चिम की सारे कुप्पा बनकर फूल गए ईस्वी सन तो याद रहा अपना संवत्सर भूल गए चारों तरफ
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