यशोदानंदन-२४
चोर कहलाना कोई पसंद नहीं करता, लेकिन कान्हा अपने लिए ‘माखनचोर’ का संबोधन सुनकर भी मुस्कुराते रहते थे। मातु यशोदा
Read Moreचोर कहलाना कोई पसंद नहीं करता, लेकिन कान्हा अपने लिए ‘माखनचोर’ का संबोधन सुनकर भी मुस्कुराते रहते थे। मातु यशोदा
Read Moreश्रीकृष्ण जैसे-जैसे बड़े हो रहे थे, यमुना के प्रति आकर्षण वैसे-वैसे ही बढ़ रहा था। यमुना का किनारा ही उनके
Read Moreयमलार्जुन के पेड़ कोई पौधे नहीं थे, विशाल वृक्ष थे। उनके गिरने से बिजली चमकने के समय उत्पन्न ध्वनि की
Read Moreमातु यशोदा! अपनी स्मृतियों पर तनिक जोर डालें। श्रीकृष्ण के शिशु-काल की शरारतों को याद कीजिए। क्या कोई सामान्य बालक
Read Moreछः महीनों में ही श्रीकृष्ण घुटनों के बल मकोइया बन पूरे आंगन में विचरण करने लगे। चलते समय वे किलकारी
Read Moreश्रीकृष्ण ने अवतरण के प्रथम दिवस से ही अपनी अद्भुत बाललीला आरंभ कर दी थी। वे उन्हीं को अधिक
Read More“देख रहे हैं आर्य! आज मेरा लल्ला तीन मास और एक पक्ष का हो गया है। अत्यन्त स्वाभाविक रूप से
Read Moreकैसी विडंबना थी – गोकुल में जहां आनन्दोत्सवों की शृंखला थमने का नाम नहीं ले रही थीं, वही मथुरा में
Read Moreपूतना-वध हो चुका था लेकिन कैसे और क्यों हुआ था, सामान्य मनुष्यों की समझ के बाहर था। यह रहस्य
Read Moreनन्द बाबा और मातु यशोदा के नेत्रों से आनन्दाश्रु छलक रहे थे। समस्त गोकुलवासी भी आनन्द-सरिता में गोते लगा रहे
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