ग़ज़ल
मुश्किलें कुछ इस तरह की थी,सखे ! दुश्मनों से दोस्ती भी की , सखे ! तपके सूरज ढल गया जो
Read Moreहे प्रियतम! तुम अब आओगे ? मन मरुथल में प्यास जगी है , प्रेम जलद कब बरसाओगे ? देखों कैसे
Read Moreजल बिन मीन सरीखा यह मन । यह मौसम के अलंकार सब । प्रियतम के साजो सिंगार सब । कजरी,
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