ले चलें !
लेखनी! संगदिल हवा की बेवफाई तक चलें ! ठंड से हारी हुई दुबली रजाई तक चलें ! ठंड में
Read Moreक्यों रसाल का स्वप्न देखते , मैंने तो कीकर बोये थे । झुर्री पड़े ,पुराने चेहरे । उर में घाव
Read More1- अब चुनाव मे खुब चले, मुर्गा दारू नोट । जो जैसा खर्चा करे,वैसे पावे वोट ।। 2- खादी
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