गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 24/12/201626/12/2016 ग़ज़ल जब चांद नहीं तो तारों का मतलब ही क्या? मरुथल में जवां बहारों का मतलब ही क्या? * वह का Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 23/12/201624/12/2016 ग़ज़ल सच कहने का मूल्य चुकाना पड़ता है। कांटों में भी राह बनाना पड़ता है । * अंधेरे से जंग छेड़ Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 18/12/201618/12/2016 ग़जल ये अफसर भी होगा बेईमान, चंद लोगो को खबर थी । बिकेगा पैसे से ईमान चंद लोगों को खबर थी Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 15/12/201615/12/2016 गीत : अमावस की रातें ये अमावस की रातें, हमसे करती हैं बातें। छेड़ जाती हैं मन को, चाँदनी की बरातें। कुछ उजड़ते घरौंदे, टूटते Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 07/12/201607/12/2016 गीत तुमको गीतों की रानी लिखूँ ,प्रियतमे ! प्रेम की एक कहानी लिखूँ ,प्रियतमे ! खुद को गालों का तिल, तुमको Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 06/12/201607/12/2016 गजल हम अपने गाँव का बचपन सुहाना, भूल न पाये । लंगोटिया यार वो अन्नू दिवाना ,भूल न पाये । वो Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 29/11/2016 ग़ज़ल बहुत मनाया, वो न माने, चले गये । तोड़ के सारे ताने बाने चले गये । दादी के किस्सों मे सच्चे लगते थे, बचपन के वो राजघराने चले गये । जात, पाँत, Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 29/11/2016 ग़ज़ल नहीं गर तेरे स्तर का हूँ । बतला दो, तो फिर मैं क्या हूँ ?, तुम विद्युत क्रत्रिम प्रकाश Read More