गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 18/03/2021 गीत चंद सपने मर गये तो क्या हुआ ,हम नये सपने सजाने चल दिये ।हर तरफ पतझार है तो क्या हुआ,हम Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 15/03/2021 गीतिका दिन को खटना ,रात को खटना ।जारी है साँसो का घटना । कल तक जो मंजिल लगती थी,आज लग रही Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 06/03/202106/03/2021 ग़ज़ल बंधन पुराने तोड़ ,रीति नव चलाइये!बेटियाँ बचाइये जी, बेटियाँ पढ़ाइये ! दो घर महकायेंगी, ये धरती की परियाँ,कोख में न Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 01/03/2021 गीत उर में अवसाद है । चाँदी सी शुभ्र रात हवा भी मचल रही है।नदिया के तन पे,धवल-चाँदनी फिसल रही है। Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 19/02/2021 गीत खपरैले के नीचे, गौरैया के बच्चे रहते थे ।।यह बच्चे एक दिन, उड़ जायेंगे, दादा जी कहते थे ।*खपरैले में Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 19/02/202119/02/2021 गीत राम हमारे राष्ट्रपुरुष हैं, आओ सब ! गुणगान करें !राम नाम का यज्ञ चल रहा , आओ समिधा दान करें। Read More
पर्यावरण *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 26/01/202127/01/2021 भारतीय कपि : हूलूक गिब्बन कपियों की पूरे विश्व में चार प्रजातियाँ पाई जाती हैं, गोरिल्ला, चिंपैंजी, ओरंगुटान और गिब्बन , इनमें गिब्बन सबसे छोटे Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 25/01/2021 गीत क्षितिज तीर पीड़ा के गहरे से चित्र हुए ,ज्यों ज्यों गहराने लगी, जाड़ों की रात है। अल्पायु दिन बीता ,लंबी Read More
गीत/नवगीत *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 25/01/2021 गीतिका देर तक याद मुझे आती रही ।बारहा दिल मेरा दुखाती रही । लोग कहते रहे, गजल है हुई,कलम थी अश्क Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी 21/10/2020 गीतिका पीड़ा के गीत हो रहे हम ,रोज कलम से ।चुपचाप प्रिये ! रो रहे हम,रोज कलम से । कुछ दाग Read More