ग़ज़ल
नम मिट्टी पत्थर हो जाये ऐसा कभी न हो मेरा गाँव, शहर हो जाये ऐसा कभी न हो। हर इंसान
Read Moreऐसे क़ातिल से बचिए जो रक्षक भी होता है गुड़ में ज़हर मिलाने वाला वंचक भी होता है आंख बंद
Read Moreमिट्टी का जिस्म है तो ये मिट्टी में मिलेगा एहसास हूँ मैं कौन मुझे दफ़्न करेगा। तिरते हैं सफीने जो
Read Moreमेरे हालात पे हंसने वालो फूल पैरों से कुचलने वालो अपने हाथों की लकीरें देखो बेसबब औरों से जलने वालो
Read Moreनज़र उठाये तो वो बेक़रार हो जाये ख़ुदा करे कि उसे हमसे प्यार हो जाये भले वो उसके बाद हमसे
Read Moreउधर बुलंदी पे उड़ता हुआ धुआं देखा इधर ग़रीब का जलता हुआ मकां देखा किसी अमीर ने दिल तोड़ दिया
Read Moreमारा गया इंसाफ़ मांगने के जुर्म में इंसानियत के हक़ में बोलने के जुर्म में मेरा गुनाह ये है
Read Moreचिनगारियों की सुर्ख डगर देख रहा हूं इक आग का दरिया है जिधर देख रहा हूं। बाहर से खूब जगमगा
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