गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 06/01/2021 ग़ज़ल खुली आँख से ख़्वाब देखा करेंगे। उन्हें हर तरह मिल के पूरा करेंगे। सही बात कहना तो जारी रहेगा, न Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 02/01/202102/01/2021 ग़ज़ल वक्त बदला तो सूरत बदल जाएगी। एक दिन ये जवानी भी ढल जाएगी। खुद पे इतना न इतराइये अनवरत, रफ्ता Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 30/12/2020 ग़ज़ल बदगुमानी से भरी कुछ शोखियां अच्छी लगीं। उसके मुंह से हर तरह की गालियां अच्छी लगीं। खूबियां अच्छी लगीं कुछ Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 28/12/2020 ग़ज़ल जो वतन के लिए सर कटाते रहे। याद तादेर सब को वो आते रहे। वो हमें हम उन्हें घर बुलाते Read More
कविता *हमीद कानपुरी 25/12/2020 अटल हमारे अटल तुम्हारे अटल हमारे अटल तुम्हारे। नहीं रहे अब बीच हमारे। जन जन के थे राज दुलारे। अटल हमारे अटल तुम्हारे। बेबाक Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 21/12/2020 ग़ज़ल पाप मत किया करो। रब से कुछ डरा करो। जग से मत डरा करो। बात हर कहा करो। प्यार से Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 18/12/2020 ग़ज़ल बे ईमानों को मिला है जाम क्यूँ। बेइंसाफ़ी आजकल है आम क्यूँ। जब फसादी ठौर पर था ही नहीं, फिर Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 18/12/2020 ग़ज़ल मुनासिब आशियाना चाहता है। सुकूं के पल बिताना चाहता है। वो खुलकर मुस्कुराना चाहता है। नहीं कोई ख़ज़ाना चाहता Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 18/12/2020 ग़ज़ल वक्त नहीं बेकार करेगे। हर सपना साकार करेंगे। दिनभर उससे प्यार करेंगे। एक नया व्यापार करेंगे। अच्छा अब व्यवहार करेंगे। Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 17/12/2020 ग़ज़ल वो कभी दर ब दर नहीं होते। लोग जो बे खबर नहीं होते। गर खुले जानवर नहीं होते। खेत ज़ेरो Read More